संतो शब्दई शब्द बखाना | पाँचइ शब्द पाँच हैं मुद्रा काया बीच ठिकाना

संतो शब्दई शब्द बखाना, शब्द फांस फँसा सब कोई शब्द नहीं पहचाना ॥1॥ प्रथमहिं ब्रह्म स्वं इच्छा ते पाँचै शब्द उचारा, सोहं, निरंजन, रंरकार, शक्ति और ओंकारा ॥2॥ पाँचै तत्व प्रकृति तीनों गुण उपजाया, लोक द्वीप चारों खान चैरासी लख बनाया ॥3॥ शब्दइ काल कलंदर कहिये शब्दइ भर्म भुलाया, पाँच शब्द की आशा में सर्वस मूल गंवाया ॥4॥ … Read more

मो सम कौन बड़ा परिवारी | ज्ञानी गुरु विवेकी चेला

मो सम कौन बड़ा परिवारी ।। सत्य है पिता धर्म है भ्राता, लज्जा है महतारी । शील बहन संतोष पुत्र है, क्षमा हमारी नारी ।।1।। मन दीवान सुरति है राजा, बुद्धि मंत्री भारी । काम क्रोध दुई चोर बसतु हैं, इनके डर है भारी ।।2।। ज्ञानी गुरु विवेकी चेला, सतगुरु है उपकारी । सत्य धर्म … Read more

बूझो-बूझो पंडित अमृतवाणी | बरसे कम्बल भींजे पानी

बूझो–बूझो पंडित अमृतवाणी, बरसे कम्बल भींजे पानी, लौकी बूड़े सील उतराय, मछली धरि के बगुलहिं खाय, धरती बरसे सूरज नहाय, ओरिया का पानी बरेडियाई जाय, तर भाई घड़ा ऊपर पनिहारी, बूझो–बूझो पंडित अमृतवाणी।। तर भई छानी ऊपर भई भीत, यह दुनिया की उलटी रीत, चिलवा के तट पर टेंगनी बियानी, बूझो–बूझो पंडित अमृतवाणी।। ठाढ़े डोमवा … Read more

देखि देखि जिय अचरज होई | धारती उलटि अकासहिं जाई

देखि देखि जिय अचरज होई। यह पद बूझै बिरला कोई ॥1॥ धारती उलटि अकासहिं जाई। चिंउटी के मुख हस्ति समाई ॥2॥ बिन पौनेजहँ परबत उड़ै। जीव जन्तु सब बिरछा बुड़ै ॥3॥ सूखे सरवर उठै हिलोर। बिन जल चकवा करै कलोल ॥4॥ बैठा पंडित पढै पुरान। बिन देखे का करै बखान ॥4॥ कह कबीर जो पद … Read more

मँड़ये के चारन समधी दीन्हा | पुत्र व्यहिल माता

मँड़ये के चारन समधी दीन्हा, पुत्र व्यहिल माता॥1॥ दुलहिन लीप चौक बैठारी। निर्भय पद परकासा॥2॥ भाते उलटि बरातिहिं खायो, भली बनी कुशलाता॥3॥ पाणिग्रहण भयो भौ मुँडन, सुषमनि सुरति समानी॥4॥ कहहिं कबीर सुनो हो सन्तो, बूझो पण्डित ज्ञानी॥5॥ शब्दार्थ कबीर साहेब जी यहाँ जिस अनोखी विवाह का उल्लेख कर रहे हैं उसमें मँड़ये (मतलब मंडप, जो … Read more

झीनी-झीनी बीनी चदरिया | दास कबीर जतन करि ओढी

झीनी-झीनी बीनी चदरिया ॥ काहे कै ताना काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया ॥ १॥ इडा पिङ्गला ताना भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया ॥ २॥ आठ कँवल दल चरखा डोलै, पाँच तत्त्व गुन तीनी चदरिया ॥ ३॥ साईं को सियत मास दस लागे, ठोंक ठोंक कै बीनी चदरिया ॥ ४॥ सो चादर … Read more

गुरु ने मँगाई चेला | एक न्यामत लाना रे

गुरु ने मँगाई चेला, एक न्यामत लाना रे॥ पहली भिक्षा अन्न ले आना, गाँव नगर के पास न जाना। चलती चक्की छोड के चेला, झोली भर के लाना॥ 1 ॥ दूसरी भिक्षा जल भर लाना, नदी कुँआ के पास न जाना। गंदा ऊजला छोड के चेला, तूम्बी भरके लाना॥ 2 ॥ तीसरी भिक्षा लकडी लाना, … Read more

शबद अनाहत बागा | अवधूत गगन मंडल घर कीजै

अवधूत गगन मंडल घर कीजै। ⁠अमृत झरै सदा सुख उपजै,बंक नाल रस पीवै ॥ मूल बाँधि सर गगन समांनां,सुषमनं यों तन लागी । कांम क्रोध दोऊ भया पलीता,तहां जोगणीं जागी ।। मनवां जाइ दरीबै बैठा,मगन भया रसि लागा। कहै कबीर जिय संसा नाँहीं,सबद अनाहद बागा ॥ आध्यात्मिक व्याख्या कबीर दास जी एक ऊंचा कोटि के … Read more

ज्ञान-गुदड़ी | Kabir Ki Gyan Gudri | ज्ञान-गुदड़ी क्या है | ज्ञान-गुदड़ी का मतलब

इस पोस्ट में, मैं पहले ज्ञान गुदड़ी क्या है, जिसे कबीर दास जी ने धरमदास जी को बताया है उसको लिखने वाला हूँ | बाद में मैं ज्ञान गुदड़ी का अध्यात्मिक मतलब क्या है बताने वाला हूँ| मै चाहता हूँ की यह ज्ञान गुदड़ी का मतलब जन-जन तक सरल रूप में पहुँचे और सब इसका … Read more