About Kabir Das

कबीर दास  का जन्म 1398 ई० में काशी में लहरतारा तालाब में उत्पन्न कमल के मनोहर पुष्प के ऊपर बालक के रूप में हुआ था। उनके असली माता-पिता कौन थे, इस बात का कोई साक्ष्य नहीं है ।

कबीर दास  का पालन-पोषण नीरु और नीमा नाम के जुलाहा दम्पति ने किया था ।

His famous books

कबीर दास  के कुछ प्रमुख रचनाओं में बीजक, कबीर ग्रंथावली, अनुराग सागर, सखी ग्रंथ आदि है।

His Teaching & Spirituality

कबीर दास  के अनुसार, जीवन जीने का तरीका ही असली धर्म है । कबीर दास ने अपने सम्पूर्ण जीवन में मानवता, नैतिकता और धार्मिकता का पालन किया और उसका वास्तविक पाठ पढ़ाया।

कबीरदासजी ने कहा है – 
आत्मा और राम एक है – आतम राम अवर नहिं दूजा।
 
राम शब्द का अर्थ है – रमन्ते इति रामः, जो रोम-रोम में रहता है, जो समूचे ब्रह्मांड में रमण करता है|
 
राम नाम कबीर का बीज मंत्र है। रामनाम को उन्होंने अजपा जप कहा है। यह एक चिकित्सा विज्ञान पर आधारित सत्य है कि हम २4 घंटों में लगभग २१६०० श्वास भीतर लेते हैं और २१६०० उच्छावास बाहर फेंकते हैं। 
 
इसका संकेत कबीर दास जी ने इस उक्ति में किया है –
 
सहस्र इक्कीस छह सै धागा, निहचल नाकै पोवै।
 
मनुष्य २१६०० धागे नाक के सूक्ष्म द्वार में पिरोता रहता है। अर्थात प्रत्येक श्वास – प्रश्वास में वह राम का स्मरण करता रहता है।